फ्री का चक्कर फंसा सकता साइबर अपराधियों के चक्रव्यूह में

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कानपुर। कोई फ्री में कुछ भी नहीं देता है तो भला आपको लाखों और करोडो रुपये कैसे दे सकता है। अक्सर लोग यह बात सोचे समझे बगैर लालच में पड़ जाते हैं। उनके पास जो भी कुछ होता है वह भी गंवा देते हैं। यह सभी साइबर अपराध के अलग-अलग तरीके हैं, जिनकी जरा सी चूक भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है।
यह बातें सहायक पुलिस आयुक्त अपराध मोहसीन खान ने कही। वह रविवार को केडी रिसार्ट में आयोजित साइबर अपराध गोष्ठी में रोटरी क्लब के सदस्यों और बच्चों को जानकारी दे रहें थे। उन्होंने बताया की हैकरों से बचाव के लिए जागरूक होने की जरूरत है। साइबर अपराधी हमसे ही सूचना लेकर वारदात को अंजाम देते हैं।
सोशल मीडिया अकाउंट का हमेशा टू स्टेप वैरिफिकेशन करना चाहिए। इससे कोई आपका अकाउंट हैक करने की कोशिश नहीं कर पाएगा। अगर कोई ऐसा करने का प्रयास करता है तो उसका अलर्ट मैसेज आपके पास आ जाएगा। साइबर सेल के प्रभारी हरमीत सिंह ने बताया की केवाईसी अपडेट करने, बिजली का बिल जमा न होने और कभी लाखों रुपये की लाटरी लगने के नाम पर साइबर ठग अपना जाल बिछाते हैं।
उन्होंने बताया कि कभी भी किस को खाता नंबर, एटीएम पिन और ओटीपी जैसे संवेदनशील डेटा को सार्वजनिक नहीं करना चाहिए। कभी भी कोई बैंक या नेटवर्क कंपनियां लकी ड्रा नहीं करती हैं। सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जानकारी, वीडियो और फोटो डालने से बचें।गोष्ठी में साइबर विशेषज्ञों ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, वाट्सएप समेत अन्य इंटरनेट मीडिया अकाउंट को सुरक्षित रखने के तरीके बताए। उन्हें आजकल किस तरह से हो रहे अपराध की जानकारी दी गई। गूगल पर ऑनलाइन कस्टमर केयर नंबर सर्च करने के दौरान धोखाधडी से बचने के लिए जागरूक किया।

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