कानपुर। सर्दी के मौसम में घना कोहरा, दिन ब दिन गिरता पारा और उत्तर पश्चिमी ठंडी हवा सेहत पर भारी साबित हो रही है। शहर के सरकारी और निजी अस्पतालों में काफी संख्या में लोग जुकाम, बुखार, गले में संक्रमण, सांस लेने में दिक्कत, रक्तचाप में अचानक से उतार चढ़ाव, निमोनिया समेत शरीर की अन्य समस्याओं को लेकर पहुंच रहे हैं।
जीएसवीएम मेडिकल काॅलेज संबद्ध हैलट अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या पहले के मुकाबले अधिक हो गई है। सबसे ज्यादा रोगी मेडिसिन विभाग की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। उनमें सांस फूलना, ब्लड प्रेशर, सीने में दर्द, गुर्दों में संक्रमण, सिर और हाथ पैरों में तेज दर्द जैसी दिक्कतें मिल रही हैं।
पहले के सांस, उच्च रक्तचाप, मधुमेह के रोगियों की दवाओं की डोज परिवर्तित करनी पड़ रही है। मेडिसिन विभाग के प्रो. जेएस कुशवाह ने बताया कि सर्दी काफी हो रही है, जिसमें लोगों को अपनी सेहत का ध्यान रखने की जरूरत है। जरा सी चूक लोगों को बीमार कर दे रही है। दिल, गुर्दा, शुगर के रोगियों को सावधानी बरतने की जरूरत है। सांस के रोगियों में एलर्जी की समस्या बढ़ गई है। इसकी वजह ठंड के साथ ही वातावरण में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ना है। प्रो. एसके गौतम के मुताबिक सर्दियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है, जिसकी वजह से सर्दी, जुकाम और अन्य संक्रमण लगने का खतरा रहता है। घर में अगर किसी एक सदस्य को सर्दी या जुकाम हो तो इससे अन्य सदस्यों के संक्रमित होने की आशंका है। इसके अलावा लोगों का घरों से निकलना कम होता है। इस मौसम में तेल से बनी वस्तुओं का सेवन ज्यादा किया जाता है। ऐसे में पेट संबंधित दिक्कतें भी बढ़ रही हैं। 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में पानी की कमी पाई जा रही है। यह समस्या गुर्दों की कार्य क्षमता को प्रभावित करती है।
गिर रहा रक्तचाप, फूल रही सांसें
आईएमए के सचिव डाॅ. कुणाल सहाय के मुताबिक इस समय लोगों में अचानक से ब्लड प्रेशर गिरने की समस्या आ रही है। कई लोग सांस फूलने की दिक्कत लेकर आ रहे हैं। इसमें युवाओं की संख्या भी काफी है। रक्तचाप को नजर अंदाज करने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। यह समस्या ज्यादातर देर रात या एकदम सुबह होती है। शुगर, लिवर, गुर्दा रोगियों को भी इस मौसम में डाॅक्टर को दिखाकर दवाओं की अपनी डोज बदलवा लेनी चाहिए।
फुल हो गए मेडिसिन विभाग के बेड
हैलट के साथ ही उर्सला, कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय और केपीएम अस्पताल में भी काफी मरीज आ रहे हैं। यहां के मेडिसिन विभाग के बेड लगभग फुल हो गए हैं। उर्सला और कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय की इमरजेंसी में कई रोगियों का इलाज चल रहा है। डाॅ.शैलेंद्र तिवारी ने बताया कि ब्रेन स्टोक और हार्ट अटैक के मरीज इमरजेंसी में आ रहे हैं। सर्दियों को देखते हुए अस्पताल में सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। आईसीसीयू में कई गंभीर रोगी भर्ती हैं।
ठंड के चलते हाथ पैर पडने लगे सुन्न
गलन और ठंड के चलते हाथ पैर सुन्न हो रहे हैं। हैलट अस्पताल के चर्म रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना आठ से 10 मरीज इसी तरह की दिक्कत लेकर पहुंच रहे हैं। यह समस्या महिलाओं और पानी का कार्य करने वाले लोगों को ज्यादा आ रही है। चर्म रोग विभाग के नोडल अधिकारी प्रो. डीपी शिवहरे के मुताबिक सर्दियों में ठंड के चलते नसों में सूजन आ जाती है, जिसकी वजह से खून का दौडान प्रभावित होता है। इस कारण से हाथ पैर सुन्न हो जाते हैं।
क्या करें क्या न करें
– अत्याधिक सुबह और शाम के समय घर से बेवजह बाहर न जाएं।
– गर्मी लगने पर एकदम से कपड़े न उतारें।
– रात में पानी पीने या किसी अन्य कार्य के लिए एकदम से रजाई और कंबल से बाहर न निकलें।
– मधुमेह, उच्च रक्तचाप और दिल के रोगी अपनी दवाओं का डोज बदलवा लें।
– किसी भी तरह की समस्या होने पर डाॅक्टर की तुरंत सलाह लें।
– हलका भोजन करें, घर पर ही रहकर व्यायाम या योग करें।
– सर्दी में भी पानी का प्र्याप्त सेवन करें। गुनगुना पानी पीएं।
– डाॅक्टर की सलाह के बिना दवाओं का सेवन न करें।














