अब सड़क पर चलेगी तेजस

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कानपुर। अब तेजस रेलवे ट्रैक की जगह सड़कों पर दौड़ती नजर आएगी। चौंक गए, लेकिन यह सत्य है। उत्तर मध्य रेलवे ने तेजस रोड एआरटी तैयार की है, जिसकी मदद से किसी भी ट्रेन हादसे के बाद रेस्क्यू किया जा सकेगा। यह खास तरह से विकसित की गई है, जिसको ट्रेनों के पटरी से उतरने या दुर्घटना होने पर ट्रैक को संचालित करने में सहयोग लिया जाएगा। शुक्रवार को प्रयागराज मंडल के डीआरएम हिमांशु बडोनी ने ऐसी ही एक तेजस रोड एआरटी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह टूंडला स्टेशन पर रहेगी। इस एआरटी को दादारी से इटावा तक भेजा जा सकता है।
प्रयागराज मंडल के जनसंपर्क अधिकारी अमित कुमार सिंह ने बताया कि रेल हादसे होने पर रेल एआरटी (एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन) तुरंत मौके पर पहुंचती है और राहत कार्य शुरू हो जाता है। रेलवे के पास अलग अलग स्टेशनों पर कई एआरटी है। पिछले कुछ समय से रोड एआरटी भी विकसित की गई, जिसकी मदद से वाया सड़क मार्ग से जल्दी सहायता पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। तेजस रोड एआरटी अत्याधुनिक सुविधाओं वाली है, जिसमें ट्रेन के पहिये के सेट को साथ में ले जाया जा सकता है। इसमें किसी भी तरह के उपकरण और ट्रेन के पुर्जाें को उठाने और अलग करने के टूल्स लगे हुए हैं। यह बस की तरह से है। एक समय में रेलवे के 20 कर्मचारी इसमें बैठ सकते हैं। यह एआरटी वरिष्ठ खंड अभियंता की देखरेख में संचालित की जाएगी।

कानपुर को जल्द मिलेगी तेजस एआरटी
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक प्रयागराज मंडल के अंतर्गत आने वाले कानपुर सेंट्रल को भी जल्द ही एक तेजस एआरटी मिल सकेगी। इसे जीएमसी यार्ड या फिर जूही यार्ड के पास रखवाया जा सकता है। इसको किसी भी तरह के रेल हादसे में मदद पहुंचाने के लिए भेजा जा सकेगा। इसका डिजाइन बिल्कुल अलग तरह से हुआ है। तेजस एआरटी में 1.5 टन वजन के ट्रेन के पहियों के सेट ले जाये जा सकते हैं।

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