कानपुर। अपने ज्ञान, कौशल, तकनीक और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर दुनिया भर में कामयाबी का परचम लहरा रहे आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र संस्थान के विकास और अपने जूनियरों की बेहतरी के लिए हमेशा से आगे रहते हैं। अबकी बार 1998 बैच के पुरातन छात्रों ने 8.25 करोड़ रुपये की गुरु दक्षिणा दी है। वे तीन दिन के लिए आईआईटी में एकत्रित हुए। खट्टी मीठी यादों को ताजा किया। पुरानी फैकल्टी से मुलाकात की और जूनियरों को आगे बढ़ने का मंत्र दिया। अंतिम दिन संस्थान का सहयोग करने की शपथ ली।
आईआईटी में 28 से 30 दिसंबर के बीच एल्युमिनाई मीट का आयोजन किया गया, जिसमें क्लास आफ 1998 बैच के पुरातन छात्रों के लिए सिल्वर जुबली समारोह आयोजित हुआ। इसमें काफी संख्या में एल्युमिनाई अपने परिवार के साथ आए। पूर्व छात्रों के स्वागत और समारोह के लिए कैंपस को सजाया गया। उनके रुकने और खाने पीने की विशेष व्यवस्था की गई। यह पुरातन छात्र देश के अलग अलग हिस्सों के अलावा यूएसए, यूके जर्मनी, फ्रांस आदि देशों से सम्मलित हुए। उनमें से कोई नामी कंपनी का सीईओ था तो कोई प्रशासनिक अधिकारी के पद पर सेवाएं दे रहा है। कुछ ने मेहनत से अपनी कंपनी तैयार कर ली है, जबकि एक दर्जन से अधिक एल्युमिनाई आईआईटी जैसे संस्थानों में फैकल्टी हैं।
पुरातन छात्र पहले दिन कई साल पूर्व जिन छात्रावासों में रहते थे, वहां गए और पुरानी यादों को ताजा किया। छात्रावास की स्टडी रूम, खेल मैदान, मेस और गार्डन को भी देखा। पहले के स्टाफ, गार्ड और मेस कर्मचारियों के बारे में जानकारी ली। यहां के बाद कैंपस की नर्सरी, स्कूल, हेल्थ सेंटर, परिसर में बनी दुकानों में भी गए। अकादमिक ब्लाॅक का जायजा लिया। लाइब्रेरी और लेक्चर हाॅल भी गए। पहले के मुकाबले अब विभागों का विस्तार हो चुका है। कई नई बिल्डिंग बन गई हैं। संस्थान की ओर से एल्युमिनाई को कानपुर के प्रमुख स्थानों की सैर कराई गई। कार्यवाहक निदेशक प्रो. एस गणेश ने सभी को संस्थान में चल रहे प्रोजेक्ट और शोध कार्याें की जानकारी दी। उन्होंने आगे के प्लान के बारे में बताया। आखिरी दिन संस्थान के विकास के लिए पुरातन छात्रों ने 8.25 करोड़ रुपये का आर्थिक सहयोग दिया। प्रो. अमय करकरे, देबाशीष साहू, गुंजन खंडेलवाल, पूजा अग्रवाल, विभोर स्तोगी, भावना गर्ग, अमित कुमार सिंह, अमन गर्ग, अमिय पाठक समेत काफी संख्या में एल्युमिनाई मौजूद रहे।














