महिलाओं में बच्चेदानी को सुरक्षित रखने पर हुआ मंथन

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कानपुर। कानपुर ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलाॅजी सोसाइटी (काॅग्स) की ओर से रविवार को महिलाओं में बच्चेदानी को सुरक्षित रखने को लेकर मंथन किया गया। यह सेमिनार फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिकल एंड गायनेकोलाॅजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया के सहयोग से स्वरूप नगर के एक होटल में हुआ, जिसमें कानपुर समेत कई शहरों की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ शामिल हुईं। उन्होंने बच्चेदानी में संक्रमण, सिस्ट, कैंसर समेत अन्य समस्याओं पर विचार विमर्श कर इलाज के नए तरीके बताए। डाॅक्टरों ने कई शोध कार्याें का प्रस्तुत किया, जबकि नई दवाओं के बारे में भी जानकारी दी।
नेशनल सेमिनार की अध्यक्षता इंडियन काॅलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियंस एंड गायनेकोलाॅजिस्ट (आईसीओजी) की चेयरमैन डाॅ. लक्ष्मी शिखंडे ने की। उन्होंने बताया कि शुरूआती लक्षणों से महिलाओं में बच्चेदानी संबंधी होने वाली समस्याओं को दूर किया जा सकता है। बशर्ते उन्हें समय पर डाॅक्टरों के पास आकर जांच करानी जरूरी है। कई मामले में दिक्कत दवाओं से ही ठीक हो जाती है।
कार्यक्रम का शुभारंभ काॅग्स की अध्यक्ष डाॅ. कल्पना दीक्षित, चीफ पैट्रन डाॅ. मीरा अग्निहोत्री, सचिव डाॅ. रेश्मा निगम, आईसीओजी की गवर्निंग काउंसिल मेंबर डाॅ. किरण पांडेय ने दीप जलाकर किया। इसके बाद इंडियन काॅलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियंस एंड गायनेकोलाॅजिस्ट की ओर से पांच डाॅक्टरों को उत्कर्ष सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया, जिनमें डाॅ. लक्ष्मी शिखंडे, डाॅ. मीरा अग्निहोत्री, डाॅ.किरण पांडेय, डाॅ. रेणू सिंह गहलौत, डाॅ. मोनिका सचदेवा शामिल हैं।
सेमिनार के दौरान डाॅ. किरण पांडेय की हाई रिस्क प्रेग्नेंसी मैनेजमेंट नाम से पुस्तक का विमोचन हुआ। जीएसवीएम मेडिकल काॅलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. नीना गुप्ता ने मेडिकल एंड सर्जिकल मैनेजमेंट के बारे में बताया। दिल्ली से आए डाॅ. केके राॅय और लखनऊ की डाॅ. आंचल गर्ग ने भी व्याख्यान दिए। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. संगीता आर्य और डाॅ. रामीत आहूजा ने किया।

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