कानपुर। मलेशिया, श्रीलंका, भारत, यूनाईटेड किंगडम के साथ ही साउथ एशियन देशों के डिस्लेक्सिया छात्रों की आसानी से पहचान हो जाएगी। उनकी दिक्कतों को विशेषज्ञों की मदद से दूर कर सामान्य छात्रों की तरह उन्हें पारंगत किया जा सकेगा।
यह जांच महज कुछ ही देर में छात्रों की हैंडराइटिंग से संभव होगी। अभिभाव या शिक्षक एप और वेबसाइट में उनकी लिखावट को अपलोड करेंगे, जिसका परिणाम थोड़ी ही देर में आ जाएगा। यह कार्य आईआईटी कानपुर के शोध के बाद यूके, मलेशिया, श्रीलंका और भारत के विशेषज्ञ मिलकर करने जा रहे हैं। लिखावट को किसी भी भाषा में अपलोड करना संभव रहेगा।
आईआईटी कानपुर के ह्युमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज के वरिष्ठ फैकल्टी व संस्थान के डीन एडमिनिस्ट्रेशन प्रो. ब्रज भूषण के निर्देशन में शोधार्थियों ने करीब पांच साल पहले कई स्कूलों के प्राइमरी के छात्रों की अंग्रेजी की लिखावट के सैंपल लिए। उनको मशीन लर्निंग की मदद से डिस्लेक्सिया की समस्या से जूझ रहे अन्य छात्रों की लिखावट से मिलान कराया गयाए जिससे खास तरह के पैटर्न का पता चला। इस डेटा की मदद से कानपुर और राजस्थान के 60 डिस्लेक्सिया की समस्या वाले छात्रों की पहचान संभव हुई। इन बच्चों की दिक्कतों के बारे में उनके माता-पिता और स्कूल के अध्यापकों को जानकारी नहीं थी। इस शोध को इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स (आईईईई) की अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में प्रस्तुत किया गयाए जिसके आधार पर नार्दन आयरलैंड की अल्सटर यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग के प्रो. प्रथिपन ने इसको अगले चरण में करने पर सहमति जताई। इस कार्य के लिए अल्सटर यूनिवर्सिटी की ओर से आईआईटी कानपुर को आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है, जबकि मलेशिया, श्रीलंका समेत अन्य देशों के विशेषज्ञ साथ मिलकर कार्य करेंगे।
फरवरी 2024 में श्रीलंका में होगी बैठक
प्रोजेक्ट से जुडे सभी देशों के विशेषज्ञों की बैठक फरवरी 2024 में आयोजित होगी। यहां से शोध की रूपरेखा तैयार की जाएगी। प्रो.ब्रज भूषण के मुताबिक देश की 27 भाषा की लिखावट के सैंपल के साथ ही श्रीलंका, मलेशिया व अन्य देशों के छात्रों की हैंडराइटिंग के नमूने लिए जाएंगे।
अभिभावकों की होगी काउंसिलिंग
डिस्लेक्सिया की समस्या पता चलने पर बच्चों के अभिभावको की काउंसिलिंग कराई जाएगी। उसके लिए कई तरह के विशेषज्ञ मौजूद रहेंगे। यह ऑनलाइन और ऑफलाइन तरीके से प्रशिक्षण दे सकेंगे। छात्रों को किस तरह से पढ़ाई करानी है और उन्हें किस तरह का अभ्यास कराना है यह सब बताया जाएगा।
डिस्लेक्सिया में लिखने में दिक्कत
डिस्लेक्सिया एक तरह की सीखने की समस्या है। इसमें बच्चे की बुद्धि सामान्य रहती हैए लेकिन बोले गए शब्दों को अलग ही तरह से लिखते हैं। कई बार उन्हें अक्षर पहचानने में बेहद कठिनाई होती है।














