कानपुर। दसवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय की ओर से अलग अलग जगहों पर योग पखवाड़ा मनाया जा रहा है। रविवार को योग कार्यशाला उन्नाव के गायत्री शक्तिपीठ में हुई। उद्घाटन शक्तिपीठ के व्यवस्थापक आरसी गुप्ता, डाॅ. राम किशोर, ओमकार मिश्र ने दीप प्रज्जवलन करके किया। सहायक आचाय डॉ. रामकिशोर ने कहा कि बायीं नासिक से श्वास लेने पर परानुकम्पी तन्त्रिकातन्त्र और दायीं नासिका से श्वास लेने पर अनुकम्पी तंत्रिका तंत्र सक्रिय होता है। चन्द्रभेदी प्राणायाम में लगातार बायीं नासिका से ही श्वास को भरते है और दायीं नासिका से ही श्वास बाहर करते हैं। इस प्राणायाम के दौरान परानुकम्पी तन्त्रिकातन्त्र सक्रिय होने लगता है, जिसके परिणाम स्वरुप उच्त रक्तचाप नियन्त्रित होता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय के आपाधापी और चुनौती पूर्ण जिंदगी में चिंता, तनाव अनिद्रा, रक्तचाप, अवसाद जैसी अनेक समस्याओं से आमजन पीड़ित है। इन समस्याओं में योग के अभ्यास बहुत ही उपयोगी हैं। रोगियों में अनुकम्पी तन्त्रिका तन्त्र अधिक सक्रिय रहने लगता है, जिसको नियंत्रित करने के लिए चंद्रभेदी प्राणायाम बहुत ही प्रभावशाली है। इस प्राणायाम के अभ्यास में प्रत्येक बार बायीं नासिका से ही श्वास लेते है और प्रत्येक बार दायीं नासिका से ही श्वास को बाहर निकाला जाता है, जिसके परिणाम स्वरूप पैरासिम्पैथिक नर्वस सिस्टम सक्रिय होता हैं और रक्तचाप में सुधार आता है। थायराइड को संतुलित करने के लिए मुख्य रूप से सिंहासन और उज्जयी प्राणायाम का अभ्यास बताया गया। उन्होंने बताया वर्तमान समय में अधिकतर विद्यार्थी बिस्तर पर बैठकर पढ़ते हैं, जिसके परिणाम स्वरूप उनका मेरूदण्ड आगे की ओर झुकने लगते हैं। ऐसे छात्रों को नियमित सूर्य नमस्कार, भुजंगासन, धनुरासन आदि पीछे की ओर झुकने वालों आसनों का अभ्यास अवश्य करना चाहिए। कार्यशाला में अर्थराइटिस प्रबंधन के लिए संधि संचालन, फैटी लीवर के लिए उदरशक्ति विकासक क्रिया, उड्डियान बंध, गैस के लिए पवनमुक्तासन, कमर दर्द के लिए मकर और भुजंगासन आदि के अभ्यास कराए। सीनियर योग छात्र ओमकार मिश्रा, आकृति त्रिपाठी, पीहू सिंह और छवि निरंजन आदि ने सहयोग प्रदान किया। गायत्री शक्तिपीठ के व्यवस्थापक
निश्शुल्क योग प्रशिक्षण शिविर आयोजित
‘योगोत्सव पखवाड़े‘ के अन्तर्गत निःशुल्क योग प्रशिक्षण शिविर के ग्यारहवें दिन योग प्रशिक्षिका सोनाली धनवानी ने प्रतिभागियों को बैकवर्ड बेंडिंग वाले आसनों का अभ्यास करवाया, जिसमें भुजंगासन, उष्ट्रासन, धनुरासन आदि शामिल है।
योग प्रशिक्षिका ने बताया कि शारीरिक स्तर पर पीछे की ओर झुकने वाले आसन अनेक लाभ प्रदान करते हैं। ये आसन पेट की मांसपेशियों को फैलाते हैं, रीढ़ को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियों को टोन और मजबूत करते हुए स्लिप्ड डिस्क और पीठ से संबंधित अन्य समस्याओं जैसी स्थितियों को रोकने में योगदान देते है।















