कानपुर। रेलवे की समस्याएं जल्द दूर हो सकेंगी, जबकि तकनीक का लाभ मिलेगा। ट्रेन के इंजन ग्रीन एनर्जी से चलेंगे और कोच की बैटरियां हाईड्रोजन फ्यूल से चार्ज हो सकेंगी। नई तकनीक विकसित होगी। यह सब सेंटर फाॅर रेलवे रिसर्च के अंतर्गत किए जाएंगे, जिसका गठन रेलवे के रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड आर्गेनाइजेशन के सहयोग से आईआईटी कानपुर में किया जा रहा है। इसके लिए रेलवे बोर्ड की ओर से संस्थान को 18 करोड़ रुपये दिए जाएंगे, जिसमें से 8.8 करोड़ रुपये संस्थान को मिल गए हैं।
सेंटर फाॅर रेलवे रिसर्च में कई तरह के प्रोजेक्ट आएंगे, जबकि नए-नए स्टार्टअप करने का मौका मिलेगा। रेलवे के सिविल, इलेक्ट्रिक, इलेक्ट्रॉनिक्स, ट्रेनों के संचालन, लोको, ट्रेक मैनेजमेंट सिस्टम समेत कई क्षे़त्रों में कार्य किया जाएगा। यहां पर आईआईटी के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ रेलवे के इंजीनियरों के साथ मिलकर कार्य करेंगे। यह सेंटर इस साल दिसंबर तक चालू हो जाएगा। इसकी अलग से बिल्डिंग तैयार की जा रही है।
रेलवे के नई दिल्ली और प्रयागराज मंडल के अधिकारी आईआईटी के विशेषज्ञों के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं। पिछले दिनों रेलवे बोर्ड के अधिकारियों ने संस्थान में आकर कई फैकल्टी के साथ विचार विमर्श भी किया था। उनकी प्रो. वैभव श्रीवास्तव, प्रो. आलोक रंजन, प्रो. प्रबोध बाजपेई के साथ प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा भी हुई थी। सीनियर डीईई राहुल त्रिपाठी ने बताया कि कुछ प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू हो गए हैं। आईआईटी प्रयागराज मंडल के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। एक प्रोजेक्ट जल्द ही शुरू हो जाएगा।
इन क्षेत्रों में होगा कार्य
– अब तक विदेशों से मंगवाए जा रहे उपकरण देश में बन सकेंगे।
– ट्रेनों का ट्रेकिंग सिस्टम और बेहतर किया जाएगा।
– रेलवे टैक पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने को लेकर काम होगा।
– कोच में और पैंटी कार में सुविधाएं बढ़ाने के लिए कार्य किए जाएंगे।
– ट्रैक से उतरे इंजन को तुरंत चालू कराने की तकनीक।
– ओएचई लाइन में आने वाली फ्लक्युएशन की समस्या दूर होगी।
– ट्रेनों के इंजन को और बेहतर किया जाएगा। उसका सफर आरामदायक रहेगा।
सेंटर से होने वाले फायदे
– रेलवे को एक ही भवन में सभी विशेषज्ञों का साथ मिल जाएगा।
– छात्र नए नए स्टार्टअप लेकर आएंगे, जिनकी मदद से तकनीक विकसित होगी।
– रेलवे को किसी भी समस्या के लिए विशेषज्ञों की राय मिल सकेगी।
– रेलवे अपने स्टेशनों को सेंटर के सहयोग से अत्याधुनिक कर पाएगा।
– ट्रेनोंऔर रेलवे ट्रैक की माॅनीटरिंग और बेहतर हो जाएगी।
– सेमी स्पीड ट्रेनों की तकनीक पर और कार्य हो पाएगा।
– कोच व ट्रेनों के डिजाइन अत्याधुनिक हो सकेगी।














