तीन दिन बाद और कंपकंपी छुड़ाएगी सर्दी

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कानपुर। धुंध, बादल और हल्की बूंदाबांदी से जहां तापमान में उतार चढ़ाव जारी है, वहीं कड़ाके की ठंड के तेवर भी पहले के मुकाबले कुछ कम जरूर हुए हैं। अब अगले तीन दिन बाद सर्दी फिर से छुड़ाने वाली होगी। धूप निकलेगी, जबकि हवा सामान्य से थोड़ी तेज चलेगी। उत्तर भारत के शहरों में कोहरे का प्रभाव और बढ़ने की संभावना है। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डाॅ.एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि उत्तर पश्चिमी और अरब सागर व बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर आ रही हवाओं के मिलन से चक्रवाती हवा का क्षेत्र विकसित हो गया है। इसकी वजह से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई शहरों में बारिश हो रही है। अत्याधिक ऊंचाई पर बादल छाए हुए हैं, जिससे धूप नहीं निकल पा रही है। वहीं दूसरी ओर से बारिश के चलते कोहरा नहीं बन पा रहा है। तापमान में उतार चढ़ाव हो रहा है। पिछले दो दिनों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में तीन से चार डिग्री सेल्सियस का इजाफा हुआ है।
नया पश्चिमी विक्षोभ सोमवार की सुबह तक जम्मू कश्मीर के ऊपर सक्रिय होगा, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी के साथ ही बारिश के आसार हैं। पहाड़ों की ठंडी हवा मैदानी क्षेत्रों की ओर आएगी और उत्तर क्षेत्र में गलन और कंपकंपी वाली सर्दी बढ़ाएगी। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 16 और न्यूनतम 12.6 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड हुआ। मेरठ में दिन का तापमान 13.4, बरेली में 15.0, झांसी में 14.9, लखनऊ में 16.0, फुरसतगंज में 15.6, मुरादाबाद में 12.6 डिग्री सेल्सियस रहा।

आलू में पिछैती झुलसा रोग लगने की आशंका
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पादप रोग विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ.एसके विश्वास के मुताबिक सर्दियों का मौसम फसलों के लिए बेहतर रहता है। मौजूदा समय में पूरे दिन बादल छाए रहते हैं। धूप बिल्कुल नहीं निकल रही है। तापमान में गिरावट, कोहरा और हल्की बारिश के चलते आलू में पिछैती झुलसा रोग लगने के आसार हैं। हल्की बारिश से मिट्टी के साथ ही आलू की पत्तियां गीली हो जाती है, जिससे पिछैती झुलसा रोग के कारक कवक के बीज उगने लगते हैं। यह पौधों को संक्रमित करना शुरू कर देती हैं। यही स्थिति तीन से चार दिनों तक बनी रही तो पूरी फसल प्रभावित हो सकती है। संक्रमण पूरे खेत में फैल जाता है। डाॅ. विश्वास के मुताबिक आलू की पत्तियों का सिरे से अंदर की तरफ झुलसना इसका प्रमुख लक्षण है। इस रोग से बचाव के लिए फसलों पर दवा का छिड़काव किया जाना जरूरी है।

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